गोबर गाथा, गोबर की जीवाणु कीटाणुनाशक क्षमता का वैज्ञानिक प्रमाण

गोबर गाथा, गोबर की जीवाणु कीटाणुनाशक क्षमता का वैज्ञानिक प्रमाण

 

आज गोबर का नाम सुनते ही युवा पीढ़ी असहज महसूस करती है, लेकिन गोबर आज भी वही है।  वही सारे गुण आज भी गोबर में मौजूद हैं। आज बस गोबर की कीटाणु रोधी क्षमता पर बात करेंगे।

अगर चारा सही है और चौपाया पशु स्वस्थ है तो ताजे गोबर में कोई गंध नहीं होती लेकिन जैसे ही गोबर सड़ने लग जाता है तो उस में से 150 से भी अधिक रसायन वायुमंडल में मिलते हैं जिनमें मिथेन, हाईड्रोजन डाई सल्फाइड व अमोनिया आदि गैस तथा आइसोलावेरिक, बुटाईरिक व एसिटिक एसिड व 4 – मिथाईल फिनोल आदि प्रमुख हैं।

 

अमोनिया एक अच्छी विषाणु रोधी गैस है। आईसोलावेरिक अम्ल वही पदार्थ है जो बीयर में गंध पैदा करता है। एसिटिक अम्ल यानि सिरके की विशेषता आप सभी जानते ही हैं लेकिन मुझे हैरान किया बुटाइरिक अम्ल व 4 – मिथाइल फिनॉल ने। बुटाइरिक अम्ल मक्खन में भी पाया जाता है तथा एक बहुपयोगी रसायन है इस के लाभ जानने के लिए आप www.draxe.com/butyric-acid/ देख सकते हैं। यह पदार्थ मोटापा दूर करता है। आज मुझे पता चला कि हमारी मां दादी आदि थुलथुली क्यों नहीं होती थी क्योंकि गोबर पाथते वक्त वो बुटाइरिक अम्ल स्वतः सूंघ लेती थी तथा मक्खन तो रोज खाती ही थी। अब हैरान होने की बारी आप की है क्योंकि 4 – मिथाइल फिनोल व उपरोक्त कार्बनिक अम्ल मिला कर किसी अमेरिकी ने रोगाणु नाशक बना कर पेटेंट ले रखा है। पेटेंट संख्या CA 2497453 A1 है।

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जब भी मैं सुबह अपना कार्यालय “वैदिक भवन’ खोलता हूँ तो हल्की सी अमोनिया व फिनायल कि जो गंध आती है वह ही पुराने गोबर से लिपे घरों को जीवाणु, कीटाणु व रोगाणु मुक्त रखती थी यह भी आज सिद्ध हो गया। अगर आपको भी अपने घर या कार्यालय में गौमय युक्त वैदिक प्लास्टर कराना है, जिससे आपके घर की हवा शुद्ध रह सके तो आप हम से सम्पर्क कर सकते हैं। वैदिक प्लास्टर हुऐ भवन के कुछ चित्र मुझे अभी कोल्हापुर (महाराष्ट्र) से प्राप्त हुए हैं जो मैं आप लोगों के लिए यहाँ लगा रहा हूँ।

NEXT कर आगे देखें  :- गोबर जिप्सम से बना व लिपा  कार्यकाल “वैदिक भवन” 

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