गोबर-गाथा :- सबसे ज्यादा पशुओं वाले देश में क्यों एलपीजी वाले मालामाल हैं

गोबर-गाथा :- सबसे ज्यादा पशुओं वाले देश में क्यों एलपीजी वाले मालामाल हैंगोबर-गाथा

अजीब सी है दास्तान मेरे अजीब से सवाल हैं….

सबतैं ज्यादा पशुओं वाले देश में क्यों एलपीजी वाले मालामाल हैं

 

राम राम दोस्तो नमस्ते

 

दिसम्बर 2017 में भारत ने चीन को पछाड़ते हुए एलपीजी आयात करने में पहला स्थान हासिल कर ही लिया। इस अवसर पर अमेरिका की एलपीजी बेचण वाली डोरियन कंपनी का अधिकारी टेड यंग बहुत खुश हुआ और उसने भारत की जम कर तारीफ की कि देखो ये देश 2015 तक एक मिलियन टन एलपीजी प्रति माह फूंकता था और दिसम्बर 2017 आते आते प्रति माह 2.4 मिलियन टन एलपीजी फूंकणे लगा। वाह वाह वाह वाह …. उसने आगे ये भी कहा कि अभी तो बस भारत में शुरुआत है आगे देखिए होता है क्या। पहले भारत सिर्फ और सिर्फ अरब देशों से एलपीजी लेता था अब हमनें उनका एकाधिकार खत्म् कर उस व्यवसाय पर भी कब्जा जमा लिया।

 

मैनें मेरे बिटोड़े की तरफ ध्यान से देखा, वो सच में बर्बाद होने की कगार पर पहुंच चुके है। विदेशी चाल व विदेशी व्यवसाय ने स्वदेशी का कचूमर निकाल कर दिया है। आज भी सूखा गोबर एक स्वच्छ ईंधन है और ये वैज्ञानिक भी मानते हैं। गोबर आज भी पर्यीवरण संरक्षण में सहायक हो सकता है। कैसे

 

साथियो भारत में प्रतिदिन तीस लाख टन गोबर निकलता है उसकी दिन प्रतिदिन दुर्गति बढ़ती  जा रही हैऔर वहीं साथ में अपने देश में अंतिम संस्कार के लिए प्रतिवर्ष लगभग पाँच करोड़ पेड़ भी काट दिए जाते हैं और हम स्कूल व कॉलेजों में नारे लगाते हैं कि पेड़ बचाओओओओओओ…….

 

भारत भर के सब गाँवों, शहरों व सब गौशालाओं में गोबर के ढेर लगे हुए हैं। इसका प्रबंधन हमें ही करना है। शमशान घाटों में तो गोबर से चकोर लकड़ी बणा कर आये साल पाँच करोड़ के करीब पेड़ आराम से बचाए जा सकते हैं। बस आपको गीला गोबर सांचे में ढाल कर सुखा लेणा है। यह विश्व का सबसे प्राचीन Renewable Source of Energy है। इससे आप अपने घर में खाणा भी बणा सकते हैं ताकि देश की बहुमूल्य विदेशी मुद्रा एलपीजी के आयात के नाम पर विदेशों में न जाए तथा आपका खाणा भी स्वादिष्ट बणें। रै भाई सहज पकै सो मीठा होए अर थेपड़ियां पै खाणा सहज सहज ही पकता है। आपका स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा क्योंकि थोड़ी बहुत गोबर की राख रोटियां गैल अपणे आप आपके पेट में रोजाना जाती रहेगी। बाकी जो राख बचेगी उसके भी बहुत सारे उपयोग हम कर सकते हैं।

 

मॉडरन थेपड़ी व उसनै पाथण के सांचे  के कुछ चित्र आप लोगों के लिए नीचे लगा रहा हूँ जोकि मुझे अम्बाला से प्राप्त हुए हैं, आशा है ये अपणा पर्यावरण, पैसा, पेड़, व  मुद्रा व पशु बचाणे का सरलतम कार्य आपां रळ मिल कै आराम तैं कर सकां सां

गोबर तैं प्लास्टर बणाणियां आपका अणपढ़ जाटः-

डॉ. शिवदर्शन मलिक

वैदिक भवन रोहतक (हरियाणा)

9812054982

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