वर्तमान गेहूँ एक घातक विष, जो शरीर में करता है रोगों को उत्पन्न

वर्तमान गेहूं एक घातक विष जो शरीर में करती है रोगों को उत्पन्न

गेहूँ उगाने व खाने के नुकसान

गेहूँ अब हमारे जीवन का हिस्सा हो गया है

आपको पता है यह गेहूँ अनाजो में सबसे निकृष्ट है ।

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ज्वार,बाजरा मक्का ,जौ जई, रागी, कोदो के अनाज हमारे लिए इससे कई गुने अच्छे है ।

आइये आज जानते है इसे खाने के नुकसान

एसिटिक फ़ूड मनुष्य के लिए नुकसानदायक है, गेहूं का आटा एसिटिक होता है

कैसे???

सामन्यतः अनाज अमाशय में जाकर पानी सोखकर रस बनाता है पर गेहूँ की रोटी को अमाशय में पानी मिलते ही सड़न शुरू हो जाती है, इस सड़न से गैस निकलती है, बनने वाली अम्ल खट्टी हो जाती है आगे जाकर वातज व पित्तज के गम्भीर रोगों को जन्म देती है ।

आयुर्वेद में चार सफेद चीजे  हमारे भोजन में वर्जित है, उसमे  सफेद आटा भी है और गेहूँ का आटा भी सफेद होता है ।

गेहूँ का आटा फ़ास्ट फ़ूड की श्रेणी में आता है,फ़ास्ट फ़ूड  हमारे सेहत को रसायनिक खेती के खाद्यान्न से ज्यादा हानि पहुँचाता है इसीलिए यूरोपियन देश आजकल ऑर्गनिक फ़ूड के बजाय स्लो फ़ूड को महत्व देने लगे है ।

स्लो फ़ूड मतलब ज्वार,बाजरा मक्का,सवा,कोदो का आटा

हमारे पूर्वज पहले बिना केमिकल के उगाई गई यही स्लो फ़ूड खाते थे तब जाकर 80 किलो वजनी भाला, बख्तर,तलवार लेकर दिन भर युध्द कर लेते थे

आज हमारी पीढ़ी सुबह शाम गेहूँ के इस एसिटिक ओर फ़ास्ट फ़ूड को खाकर इतने कमजोर हो गये है कि 80 ग्राम के लट्ठ से युद्ध करना तो दूर 2 घण्टे पूरी ताकत से घुमा भी नही सकते ।

गेहूँ की रोटी खाकर कभी कोई महाराणा प्रताप नही बन सकता ।

 

आइये अब जानते है गेहूँ उगाने के  घातक परिणाम

खेती की भूमि की जुताई और सिंचाई जमीन के पोषक तत्वो को जमीन के नीचे लीच कर देती है या बहा देती है ।

और सबसे ज्यादा जुताई व सिचाई गेहूं को ही करना पड़ता है

बड़े बड़े जो बांध बनाये जा रहे है वह गेहूं की सिचाई की जरूरत को ध्यान में रखकर बनाये गए है

और इन बांधों ने ही न केवल नदी की अपितु प्रकृति की पूरी बायोडायवर्सिटी को तहस-नहस कर रहे है ।

सिंगल सुपर फास्फेट एसेटिक फर्टिलाइजर है यह मिट्टी के जीवाणुओं व केचुओं को तेजाब के जैसे मरता है

यही नही मिट्टी में फास्फोरस की मात्रा को बढ़ाकर मिट्टी को सख्त भी कर रहा है जिसके लिए अब किसान 65 hp के ट्रेक्टर लेने को मजबूर है

यही नही यही ssp मिट्टी के 6 इंच नीचे एक पानी के लिए एक अभेद परत भी बना रहा है जो पानी को भूमि के अंदर जाने से रोक देता है परिणाम जमीन का वाटर लेवल का असुरक्षित होना ।

गेहूं की नगदी के लालच में किसान भी इसे ही ज्यादा उगा रहा है जिससे दूसरे फायदेमंद अनाजो का आस्तिव ही संकट में आ गया है ।

 

इसका विकल्प

 

देशी अनाज बोये जिनमे ज्यादा जुताई, सिचाई,खाद की जरूरत नही होती है और मिट्टी पानी व हमारा स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा ।

यदि गेहूँ बोना और खाना ही है तो गेहूँ जैसी दिखने वाली एक अनाज कनक को खायें ।

इसमे गेहूँ जैसा सफेदपन नही सोने जैसा पीलापन होता है

इसका आटा जैसे गाय का दूध पीला होता है वैसे पीला होता है,

यह पानी मिलने पर अमाशय में रस बनाता है , इसकी रोटी दिनभर मुलायम रहती है । अच्छे से पच जाता है ।

 

भारत की देशी गेहूँ की प्रजाति बंशी में ऐसे ही लक्षण है ।

 

 

 

बेलजी  भाई

नरसिंहपुर mp

 

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