जानें – इस ऐतिहसिक फिल्म के बारे में जिसमें पद्मावती की कहानी को इस तरह दिखाया था

जानें - इस ऐतिहसिक फिल्म के बारे में जिसमें पद्मावती की कहानी को इस तरह दिखाया थाजानें – इस ऐतिहसिक फिल्म के बारे में जिसमें पद्मावती की कहानी को इस तरह दिखाया था

 

1963 में तमिल निर्देशक चित्रापू नारायण मूर्ति ने रानी पद्मिनी की कहानी पर “चित्तौड़ रानी पद्मिनी” फ़िल्म बनायी थी. इस फ़िल्म में मशहूर अभिनेत्री वैजयंती माला ने रानी पद्मिनी का क़िरदार निभाया था. ये फ़िल्म उमा पिक्चर्स के बैनर तले बनी थी जो आरएम रामनाथन की फ़िल्म कंपनी थी.

इस फ़िल्म में शिवाजी गणेशन ने चित्तौड़ के राजा रतन सिंह का क़िरदार निभाया था. इस फ़िल्म में भी रानी पद्मिनी और दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी की कहानी दिखाई गई थी. हालांकि तब निर्माताओं ने इस फ़िल्म को ‘ऐतिहासिक फ़िक्शन’ बताया था.

इस फ़िल्म में भी खिलजी रानी पद्मिनी के प्रेम में पागल थे और उन्होंने चित्तौड़ के राजा राणा रतन सिंह को धमकी दी थी कि अगर रानी पद्मिनी का दीदार नहीं हुआ तो वह राजस्थान को बर्बाद कर देंगे.

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राणा के पास जब कोई विकल्प नहीं बचा तो वो रानी पद्मिनी को महल के तालाब के किनारे खड़े होने और उनकी छवि को एक शीशे में दिखाने के लिए तैयार हो गए. साथ ही उन्होंने अलाउद्दीन खिलजी की हत्या करने की एक गुप्त योजना भी तैयार की.

लेकिन रानी पद्मिनी का इरादा खुद को किसी अजनबी के सामने पेश करने का नहीं था. फ़िल्म में खिलजी के सामने पेश होने के बजाए रानी पद्मिनी सती हो गईं थीं.

1963 में आई इस फ़िल्म में पद्मिनी का किरदार निभा रहीं वैजयंती माला पर कई गाने फ़िल्माए गए.

वैजयंती माला एक बेहतरीन भरतनाट्यम नृत्यांगना थीं और निर्देशक ने उन पर फ़िल्म में नृत्य सीन फ़िल्माए थे.

इतिहास के जिस दौर की ये फ़िल्म है उस दौर में राजस्थान में रानियां नृत्य नहीं करती थीं.

 

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