देश के सबसे बड़े सेक्स स्कैंडल में 26 साल बाद आरोपी का आत्मसमर्पण, मुस्लिम आरोपियों ने किया था हिन्दू लड़कियों का शोषण, मास्टर माइंड था कांग्रेस का यूथ लीडर

देश के सबसे बड़े सेक्स स्कैंडल में 26 साल बाद आरोपी का आत्मसमर्पण, मुस्लिम आरोपियों ने किया था हिन्दू लड़कियों का शोषण, मास्टर माइंड था कांग्रेस का यूथ लीडर

देश के सबसे बड़े सेक्स स्कैंडल में 26 साल बाद आरोपी का आत्मसमर्पण, मुस्लिम आरोपियों ने किया था हिन्दू लड़कियों का शोषण, मास्टर माइंड था कांग्रेस का यूथ लीडरआज से 26 साल पहले 1992 में  राजस्थान के अजमेर में हुआ दिल दहलाने वाला बहुचर्चित अश्लील फोटो ब्लैकमेल कांड फिर से चर्चा में आ गया है.

अजमेर के दामन पर लगे बदनुमा कांड के फरार आरोपी सोहेल गनी चिश्ती ने 15 फ़रवरी को 26 साल बाद अजमेर की महिला उत्पीड़न मामलात अदालत में समर्पण कर दिया.

अदालत ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए. अजमेर शहर के साथ समूचे देशभर को झकझोर देने वाले सबसे बड़े अश्लील फोटो ब्लैकमेल कांड में आरोपी सोहेल गनी चिश्ती एवं अलमास फरार चल रहे थे.

इस मामले में यूथ कांग्रेस का फ़ारुख चिश्ती और नफ़ीस चिश्ती भी शामिल थे.  इस मामले के तार कई बड़े प्रभावशाली लोगों तक जुड़े हुए थे.इस मामले में कई राजनेताओ, सफेदपोशों के नाम भी सामने आए लेकिन लचर कानून व्यवस्था के चलते कुछ साबित नहीं हो सका.

कांग्रेस यूथ लीडर थे दरिंदे अधिकांश हिन्दू लडकियों का करते थे शिकार, साथ ही सभी आरोपी मुस्लिम थे 

इस स्कैंडल के मास्टरमाइंड थे फारूक चिश्ती, नफीस चिश्ती और अनवर चिश्ती. तीनों ही यूथ कांग्रेस के लीडर थे. फारूक प्रेसिडेंट की पोस्ट पर था. इन लोगों के पास राजनैतिक और धार्मिक, दोनों ही पॉवर थी.

रेप की शिकार लड़कियां ज्यादतर हिंदू परिवारों से थीं.इस अश्लील फोटो कांड का भांडा 1992 में फूटा था. सभी पीड़िताएं कॉलेज , स्कूल में पढ़ने वाली छात्राएं थी. सभी मुख्य आरोपियों सहित अधिकतर आरोपी मुस्लिम थे और अधिकतर पीड़िताएं हिन्दू लड़किया थी.

मामला इस लिए भी अतिगंभीर था क्योंकि इसमें शामिल आरोपियों में से अधिकतर आरोपी अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के प्रभावशाली ख़ादिम परिवारों से थे और लड़कियां हिन्दू परिवारों से. ख़ादिम दरगाह में काम करते है और स्वयं को मोईनुद्दीन चिश्ती के मूल वंशज मानते है.

आरोपी सोहेल गनी चिश्ती की दरगाह बाजार की फूल गली में वीडियो कैसेट की दुकान व फोटो स्टूडियो था. दुकान पर लड़कियां फोटो खिंचवाने आती थीं, जहां गनी फोटो खींच कर उनमें कांट छांट कर देता था. फोटो एडिटिंग करके लड़कियों को ब्लैकमेल किया जाता था.

आरोपी लड़कीं को अश्लील फोटो सार्वजनिक करने की धमकी देकर उससे दूसरी लड़की लाने के लिए कहते है. धीरे धीरे यह एक चैन बन गयी थी. आरोपी अधिकतर हिन्दू लड़कियों को ही निशाना बनाते थे. लड़कियों के अश्लील फोटो खींचने के बाद उन्हें ब्लैकमेल किया जाता था.

डरा धमका कर उनका यौन शोषण किया जाता था. कई बार लड़कियों को फांसने के लिए राजनीति में कैरियर चमकाने का झांसा भी दिया गया.

एक बार लड़की के जाल में फंसने के बाद उससे अन्य लड़किया लाने के लिए दवाब बनाया जाता था. इस मामले में कई सफेदपोशों , कांग्रेस के कई नेताओं के नाम भी सामने आए. लेकिन राजनैतिक प्रभाव के चलते कुछ साबित नहीं हो सका.

मामला कितना संगीन और बड़ा था इसका अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है की कहा जाता है इस मामले में 100 से ज्यादा स्कूल, कॉलेज में पढ़ने वाली मासूम लड़कियों को फांस कर उनके साथ ज्यादती की गई हालांकि अपुष्ट खबरों के अनुसार पीड़ित लड़कियों की संख्या 500 से भी ज्यादा बताई जाती है , उन्हें ब्लैकमेल करके उनके साथ रेप किया गया.

इसमें से सभी मुख्य आरोपियों सहित अधिकतर आरोपी मुस्लिम थे और अधिकांश लड़कियां हिन्दू थी. मामला सामने आते ही आरोपियों के घिनोने जाल में फंसी कई लड़कियों ने आत्महत्या कर ली थी. मामला तब उजागर हुआ जब कुछ लड़कियों के फोटो लीक होकर मीडिया तक पहुंच गए.

इसके बाद पूरा मामला उजागर गया. इस कांड ने पूरे देश मे भूचाल ला दिया था. पुलिस और महिला संगठनों की कोशिशों के बावजूद लड़कियों के परिवार आगे नहीं आ रहे थे.

इस गैंग में शामिल लोगों के नेताओं से कनेक्शन्स की वजह से लोगों ने मुंह नहीं खोला. बाद में किसी  NGO ने पड़ताल की. फोटोज और वीडियोज के जरिए तीस लड़कियों की शक्लें पहचानी गईं. इनसे जाकर बात की गई. केस फाइल करने को कहा गया.

लेकिन सोसाइटी में बदनामी के नाम से बहुत परिवारों ने मना कर दिया. बारह लड़कियां ही केस फाइल करने को तैयार हुई. बाद में धमकियां  मिलने  से दस लड़कियां भी पीछे हट गई. बाकी बची दो लड़कियों ने ही केस आगे बढ़ाया.

लडकियों ने लगातार एक के बाद एक आत्महत्याएँ की 

जिन लड़कियों की फोटोज खींची गई थीं, उनमें से कईयों ने सुसाइड कर लिया. एक ही साथ  6-7 लड़कियां  मर गईं. न सोसाइटी आगे आ रही थी, न उनके परिवार वाले. डिप्रेस्ड होकर इन लड़कियों ने ये कदम उठाया.

एक ही स्कूल की लड़कियों का एक साथ सुसाइड करना अजीब सा था. ये बात आगे चलकर केस को एक्सपोज करने में मददगार रही.ये लड़कियां किसी गरीब या मिडिल क्लास बेबस घरों से नहीं, बल्कि अजमेर के जाने-माने घरों से आने वाली बच्चियां थीं.

वर्ष 1992 में दर्ज हुए इस प्रकरण में  हालांकि 1998 में मूल मुकदमे में फैसला आ गया था. उस समय कोर्ट में पीडि़ताओं ने आरोपियों के खिलाफ गवाही दी तो कोर्ट ने 8 आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनाई थी, जो बाद में 10 साल कैद की सजा में तब्दील हो गई.

मामले में आरोपी फारुख चिश्ती (यूथ कांग्रेस नेता) के खिलाफ उस समय मुकदमा इस आधार पर नहीं चल पाया था कि वह सिजोफ्रोनिया नामक मानसिक बीमारी से ग्रस्त है.

वह ठीक हुआ तो उसके खिलाफ अलग से सुनवाई हुई और उसे भी दोषी ठहराते हुए सजा दी गई. एक आरोपी ने 1994 में जमानत पर छूटने के बाद आत्महत्या कर ली. इसी बीच वर्ष 2003 में मुख्य आरोपी नफीस चिश्ती दिल्ली में पुलिस के हत्थे चढ़ गया.

इसके बाद 2010 में नसीम उर्फ टार्जन और इकबाल भाटी भी पकड़े गए. सलीम चिश्ती की 2012 में गिरफ्तारी हुई. नफीस सहित पांच के खिलाफ मुकदमा लंबित है. इसी तरह मामले के मुल्जिम अल्मास और सोहेल गनी अभी भी फरार थे.

पीड़िताएं 26 साल बाद फिर धर्मसंकट में 

सोहेल गनी चिश्ती के समर्पण करने के बाद पीड़िताओं के घाव फिर से हरे हो गए है. 26 साल बाद पीड़िताओं को गवाही के लिए तलब किया जा रहा है. ऐसे में उनके सामने धर्मसंकट खड़ा हो गया है. जिस समय मामला सामने आया था उस समय परिस्थितियां अलग थी और आज अलग है.

26 साल पहले भयंकर मानसिक प्रताड़ना से गुजर चुकी पीड़िताओं के आज हंसते खेलते परिवार है. कइयों के बच्चों की शादी तक हो चुकी है तो कईयों के बच्चे शादी लायक है.

ऐसे में उम्र के इस पड़ाव में 26 साल पहले अपने साथ हुई ज्यादतियों की गवाही देना पीड़िताओं के लिए बेहद मुश्किल भरा हो गया है.ऐसे में अब सारी परिस्थितियों के मद्देनजर इनके खिलाफ गवाही देने के लिए आना उनके लिए पसोपेश भरा ही साबित हो रहा है.

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अजमेर शहर पर बदनुमा दाग की तरह लगे इस कांड पर आज शहर में कोई चर्चा नहीं करना चाहता, हर कोई चाहता है की इस काले अध्याय को अब भूल जाना ही बेहतर है.

 

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