जानें आखिर क्यों बिटकॉइन में डील करने लगा है अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम

जानें आखिर क्यों बिटकॉइन में डील करने लगा है अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिमजानें आखिर क्यों बिटकॉइन में डील करने लगा है अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम

कुख्यात अपराधी और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम अब बिटकॉइन में सौदे कर रहा है। ठाणे क्राइम ब्रांच की गिरफ्त में मौजूद इकबाल कासकर ने दाऊद के कारोबार से जुड़ी पुछताछ के दौरान बताया कि दाऊद जांच एजेंसियों की नजर से बचाने के लिए विश्व की सबसे महंगी उस वर्चुअल करेंसी का इस्तेमाल कर रहा है जिसकी कड़ियां चाहकर भी जांच एजेंसियां नहीं तोड़ सकतीं।

इकबाल कासकर ने एजेंसियों की पूछताछ में बताया कि अंडरवर्ल्ड की दुनिया में दाऊद की डी कंपनी अब रुपये,  डॉलर या पाउंड में नहीं बल्कि बिटकॉइन में डील करती है। बिटकॉइन को साइबर वर्ल्ड में अब तक की सबसे महंगी वर्चुअल करंसी के रूप में जाना जाता है।

सूत्रों के मुताबिक हाल ही में दाऊद के कुछ गुर्गों से पूछताछ में ये खुलासा हुआ कि डी-कंपनी बिटकॉइन में पिछले साल तक तकरीबन 15 हज़ार से ज्यादा बिटकॉइन ख़रीद चुकी है, जिसकी मौजूदा बाज़ार में वैल्यू आज की तारीख में तक़रीबन 12 अरब रुपये आंकी जा रही है।

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सूत्रों का कहना है कि ‘डार्कवेब’ या ‘डार्कनेट’ पर अपनी पहचान गुप्त रखते हुए डी कंपनी अपनी ज्यादातर अवैध डील में इसी वर्चुअल करंसी का इस्तेमाल कर रही है जिसमें एक्सट्रॉशन,  ड्रग्स,  हथियार और रियल एस्टेट जैसे धंधे शामिल हैं।

इतना ही नही इकबाल कासकर ने ये भी खुलासा किया है कि छोटा शकील ने डी-कंपनी के कारोबार को कारपोरेट की शक्ल दे दी है। कई चार्टेड एकाउंटेंट की एक पूरी बटालियन डी-कंपनी को कारपोरेट फॉर्मेट का रूप दे रही है। सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान पता चला है कि शेयर मार्केट में मौजूद कई कंपनियों से डी कंपनी मुनाफा कमा रही है।

बॉम्बे स्टाक एक्सचेंज, नेशनल स्टाक स्टाक एक्चेंज में किसी भी कम्पनी को लिस्टेड होने के बाद ही वो अपना आईपीओ। लॉन्‍च कर बाजार में उतरती है। लेकिन इन दिनो अंडरवर्ड के कई सिपहसालार शेयर मार्केट में आईसीओ यानि (Initial Coin Offering)  के जरिए बाजार में उतरी है और किसी फर्जी नाम की क्रिप्टो करेंसी इंटरनेट के बाज़ार में उतार रही है। इसका फायदा ये होता है की कंपनी को आई.पी.ओ. की तरह इक्विटी लोगों को देने की ज़रूरत नहीं होती है।

इसके साथ ही इनकम टैक्स या सेबी जैसी संस्थाओ के नियंत्रण से भी दूर रहती है। सबसे अहम बात ये है कि सालाना इस आईसीओ यानि (Initial Coin Offering) के जरिए 15 परसेन्ट का मुनाफा अंडरवर्ल्‍ड कमा रहा है। और उसकी पहचान तक किसी को पता नहीं। एक वर्चुअल करंसी होने के नाते इसके बारे में ज़्यादा जानकारी जुटा पाना फिलहाल जांच एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती ही है।

महाराष्ट्र सरकार के साइबर सेल के सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस बालसिंह राजपूत के मुताबिक अंडरवर्ल्‍ड शेयर बाजार में कितना  एक्टिव है और कैसे पैसे कमा रहा है इस पर कुछ भी साफ-साफ नहीं कहा जा सकता। इतना जरूर है कि 100 से भी ज्‍यादा कंपनियां ऐसी हैं जो आईसीओ यानि (Initial Coin Offering) के जरिए डील करती है और उनकी पहचान से जुड़ी कोई जानकारी किसी जांच एजेंसी या रिकॉर्ड में मौजूद नहीं होती, जिसमें संभव है कि करोड़ों के हवाला औऱ ब्लैकमनी का कारोबार चलाया जा रहा हो।

इसे इसलिए रोका नहीं जा सकता है क्योंकि बिटकॉइन को लेकर कोई पाबंदी भारत में नहीं है और कई विदेशी कम्पनियां अपना कारोबार बिटकॉइन में डील करती है। ऐसे में अंतराष्ट्रीय स्तर पर जो डिजीटल करेंसी है उसकी मान्यता को लेकर दुविधा है। जिसके चलते ये बता पाना मुश्किल है कि आखिर करोड़ों के डिजिटल कारोबार के पीछे कौन है।

मुंबई पुलिस और एटीएस के साइबर एक्सपर्ट विजय मुखी के अनुसार बिटकॉइन से डील करने की सबसे बड़ी वजह है पहचान को छुपाकर रखना। आम तौर पर बैंकिंग सेक्टर में किसी अकाउंं से कितना पैसा, किस अकाउंट में गया और सोर्स ऑफ इनकम क्या है और टैक्स से जुड़ी हर जानकारी मिल जाती है। लेकिन बिटकॉइन में ऐसा नहीं है।

करोड़ाेें रुपयों को बिटकॉइन की शक्ल देकर मोबाइल के महज एक पासवर्ड से लाखों का ट्रांजेक्शन इधर से उधर हो जाता है और भेजने वाले या रिसीव करनेवाले की फर्जी पहचान महज बारकोड की गुत्थियों में उलझी रह जाती है।
 

बिटकॉइन एक वर्चुअल यानी आभासी मुद्रा है। आभासी मतलब कि अन्य मुद्रा की तरह इसका कोई भौतिक स्वरूप नहीं है यह एक डिजिटल करेंसी है।

 

यह एक ऐसी करेंसी है जिसे आप ना तो देख सकते हैं और न छू सकते हैं। यह केवल इलेक्ट्रॉनिकली स्टोर होती है।

 

मौजूदा वक्त में, 1 बिटक्‍वाइन = 9739 डॉलर (तक़रीबन सवा छह लाख रुपये) है।

 

अगर किसी के पास बिटक्‍वाइन है तो वो इंटरनेट पर किसी अन्य करंसी की तरह ही सामान खरीद सकता है।

 

बिटकॉइन पर किसी व्यक्ति विशेष सरकार या कंपनी का कोई स्वामित्व नहीं होता है।

 

बिटकॉइन करेंसी पर कोई भी सेंट्रलाइज कंट्रोलिंग अथॉरिटी नहीं है।

 

बिटकॉइन के इस्तेमाल पर क्रेडिट या डेबिट कार्ड की तरह कोई अतिरिक्त शुल्क अदा करना नहीं पड़ता।

 

भारत समेत कई देशों में बिटकॉइन जैसी करेंसी को लेकर रुख साफ़ नहीं है कि ये करेंसी लीगल है या नहीं।

 

बिटकॉइन पेमेंट के काफी मामलों में इसके मालिक की पहचान कर पाना मुश्किल होता है। यही वजह है कि हाल ही में हुए रेंसमवेयर अटैक के दौरान भी फिरौती की रकम बिटकॉइन से ही मांगी जा रही थी।

 

बिटकॉइन का आविष्कार सातोशी नकामोतो नामक एक अभियंता ने 2008 में किया था और 2009 में ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर के रूप में इसे जारी किया। मौजूदा वक्त में बिटकॉइन इंटरनेट यूजर्स में बेहद लोकप्रिय है।

 

इससे पहले अंडरवर्ल्ड रियल एस्टेट, शेयर मार्केट और गोल्ड में ट्रेडिंग करता आया है लेकिन वर्चुअल करंसी में ट्रेडिंग की जानकारी ख़ुफ़िया एजेंसियों के लिए भी बिल्कुल नई है।

 

अब वर्तमान दौर में अंडरवर्ल्ड ने अपने काम करने के तरीके बदल लिए है।

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