पटाखें बेन से नही मिली राहत – एक सांस में 22 सिगरेट के बराबर धुआं पी रहे हैं दिल्लीवासी

पटाखें बेन से नही मिली राहत - एक सांस में 22 सिगरेट के बराबर धुआं पी रहे हैं दिल्लीवासीपटाखें बेन से नही मिली राहत – एक सांस में 22 सिगरेट के बराबर धुआं पी रहे हैं दिल्लीवासी

 

कोर्ट द्वार हिन्दुओ के सबसे बड़े त्यौहार पर प्रदूषण के चलते पटाखों पर बेन लगाने से भी दिल्ली का प्रदुषण काबू में नही आया हालात हो गये हैं की दिल्लीवालों के लिए घरों से निकलना और खुली हवा में सांस लेना आफत बन गया है. तीन दिनों से दिल्ली के आसमान में धुंध छाया हुआ है, जो बेहद जहरीला और खतरनाक है. अगर इस धुंध की धुम्रपान से तुलना की जाए तो दिल्लीवासी एक सांस में करीब 22 सिगरेट के बराबर धुआं पी रहे हैं. डॉक्टरों के मुताबिक, ये अस्थमा और हार्ट के मरीजों के लिए जानलेवा तक साबित हो सकता है.

 

पिछले तीन दिनों से दिल्ली-एनसीआर में ऐसे हालात बन चुके हैं कि लोग जब अपने घरों से चेहरे पर मास्क लगाकर निकल रहे हैं. धुंध यानी स्मॉग उस प्रदूषित हवा को कहा जाता है जो धुएं (स्मोक) और कुहासे यानी (फॉग) के मिलने से बनता है.

 

गाड़ियों और फैक्टरियों से निकले वाले धुएं में राख, सल्फर और दूसरे खतरनाक गैस मौजूद होते हैं, कोहरे के संपर्क में आती ही ये स्मॉग बन जाता है, जो कई बीमारियों को पैदा कर सकता है. इसके अलावा नवंबर-दिसंबर महीने में हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने से भी दिल्ली में स्मॉग बढ़ता है.

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दिल्ली-एनसीआर में हवा की गति रुक जाने की वजह से वायुमंडल में मौजूद प्रदूषण बताने वाला मानक PM 2.5 खतरनाक स्तर तक बढ़ चुका है. दिल्ली के कई इलाके में तो ये 500 के पार पहुंच चुका है. जिसे सामान्य स्तर पर 60 के करीब रहना चाहिए. इसे इस तरह भी समझा जा सकता है कि अगर PM 2.5 500 तक पहुंचता है तो मतलब आप एक बार में 22 सिगरेट के बराबर जहरीले और खतरनाक धुएं को सांस के जरिए शरीर के अंदर ले रहे हैं.

 

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