गौ माता राष्ट्रमाता आंदोलन पर सरकार का दमनचक्र , पुलिस प्रशासन ने बर्बरता पूर्वक खूब लाठियां भांजी

गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने के लिए संत गोपाल मणि महाराज जी द्वारा आयोजित आन्दोलन में पुलिस प्रशासन ने खूब लाठियां भांजी जिसमे महाराज जी सहित सभी आन्दोलनकर्तायो पर पुलिस ने खूब बर्बरता दिखाई बुजुर्गो और महिलाओ को भी नही छोड़ा.

रविवार 18 फरवरी को  अत्याचार की कहानी स्वयं घायल “राजीव स्वदेशी (नरेला)” की जुबानी

मै कल रामलीला मैदान गया था . वहां से राजघाट पहुचे . फिर शाम को प्रशासन ने पुलिस भाईयो द्वारा हमारी बहनो भाईयो माताओ को सडक पर गिराकर पीटा गया . एक माता को बचाने मै गया तो मुझे भी पीटा गया . परन्तु इसमे पुलिस वाले भाईयो का कोई दोष नही है. वे अपने परिवार की जीविका चलाने के लिए काले अन्गरेजो की बात मानना उनकी मजबूरी है . वे सभी हमारे भाई है.

मै इस सन्देश से आपको ये बताने का प्रयास कर रहा हू कि अभी तक सभी को सरकार चलाने का मौका मिला इस देश मे लेकिन किसी भी सरकारो ने गाय को बचाने का काम नही किया . जो गाय माता को न बचाए बल्कि गौ सेवको पर लाठी चलवाए वो सरकार मेरी तो नही है.   आपकी है या नही ये फैसला आपको लेना है .ये लूटतन्त्र वैसे ही चल रहा है जैसे अन्गरेजो के जमाने मे चलता था . जो अमर शहीद राजीव दीक्षित ने बोला है वो एक एक बात पूरी सच साबित हो रही है .

वन्देमातरम

गाय मेरी माता है. मेरी माँ रोज कट रही है .ये मेरे दिल की बडी पीडा है. ज्यादा लिखने  की  स्थिति मे नही हू.

राजीव स्वदेशी .

 

आपको बता दें गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने और गौ हत्या को रोकने के लिए देशभर की कई धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक हस्तियों ने केंद्र सरकार से एक अलग गौ कल्याण मंत्रालय बनाने की मांग की है.

भारतीय गौ क्रांति मंच के बैनर तले रविवार को रामलीला मैदान में गौ माता प्रतिष्ठा आंदोलन का आयोजन किया गया, जिसका कई सामाजिक-राजनीतिक लोगों ने समर्थन किया. इस दौरान गौ हत्या को रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा कोई ठोस कदम न उठाए जाने को लेकर गौ भक्तों और गौ रक्षकों में काफी रोष और असंतोष देखने को मिला.

रामलीला मैदान में जुटी समर्थकों की भीड़ को संबोधित करते हुए गोपाल मणि महाराज ने कहा कि पहले तो सभी राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन और देश के नागरिक गौ माता को सिर्फ एक पशु समझना बंद करें, क्योंकि यह पशु नहीं बल्कि हमारी माता है.

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इसके बहुत सारे सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व भी हैं. इसे किसी एक धर्म के कलेवर में ढालकर न देखा जाए, बल्कि इसे एक राष्ट्रीय पूंजी के रूप में देखा जाए. उन्होंने केंद्र सरकार से पड़ोसी देश नेपाल की तर्ज पर गाय को राष्ट्रीय धरोहर और राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग की.

 

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