एक भव्य हिन्दू मन्दिर जिसे तोड़ने में इस्लामिक आक्रमणकारी को 8 महीने लगे थे..

एक मन्दिर जिसे तोड़ने में एक इस्लामिक आक्रमणकारी को 8 महीने लगे थे… मान्यता है कि सूर्य मन्दिर में पूजा अर्चना करने से कोढ़ जैसे कुष्ट रोगों से छुटकारा मिलता है. विज्ञान भी मानता है कि सूर्य न केवल अन्नों, फलों आदि को पकाते हैं, बल्कि नदियों, समुद्रों से जल ग्रहण कर पृथ्वी पर वर्षा भी कराते हैं. संपूर्ण प्राणियों के वे पोषक हैं.

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सनातन के इतिहास में ढेरों मुख्य सूर्य मन्दिर हुए हैं, जिनमें से आज के दिन कुछ ही ठीक हालत में बचे हैं उनमें से एक है – उड़ीसा स्थित कोणार्क. जिनको हम बचाने में नाकाम रहे उनमें से एक है ये सूर्य मन्दिर. नाम है मार्तंड मंदिर जो कश्मीर के दक्षिणी भाग में अनंतनाग से पहलगाम के रास्ते में मार्तण्ड (वर्तमान बिगड़ कर बने मटन) नामक स्थान पर है.

हमारे मन्दिर यूँ ही नहीं होते थे आस्था के साथ हर मन्दिर की अपनी विशेषताएं होती थी जैसे इस मन्दिर की विशेषता थी कि पूरी कश्मीर घाटी को इस मन्दिर से देखा जा सकता था. मगर सेकुलरिज्म के नाम पर एक कथित भक्ति आन्दोलन 15 वीं शताब्दी में भी चला था और उसी दौर में हजारों हिन्दू मन्दिर भेंट चढ़े थे जिनमें एक ये मन्दिर भी था.

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8वीं शताब्दी के सबसे शक्तिशाली राजाओं में एक ललितादित्य ने इसका निर्माण करवाया था तो सिकन्दर नामक एक इस्लामिक आक्रमणकारी ने इसे तोड़ा था, उसे 6 से 8 महीने लगे थे फिर भी पूरी तरह तोड़ न पाया. उस दौरान लगातार आग की लपटों में रहा था ये सूर्य मन्दिर.

कश्मीर सदियों से एशिया महाद्वीप में संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान, साहित्य, दर्शनशास्त्र, धर्म एवं आध्यात्म का केन्द्र रहा था. परन्तु बेबीलोन, फारस समेत विश्व की अनेक प्राचीन एवं उन्नत सभ्यताओं को तबाह और बर्बाद करता हुआ एक शांतिप्रिय अरबी कबीलाई धर्म आखिर ऋषि मुनियों की इस महान धरती पर भी आ पहुँचा और इसकी प्राचीन और गौरवशाली संस्कृति को बेरहमी से निगल लिया.

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आज कश्मीर में यदि कुछ बचा है तो वो है केवल इस्लाम, ठंडी फिजाओं में घुली बारूद की गंध के बीच बन्दूकों के साये में जिन्दगी और अतीत के उस स्वर्णिम काल के लोगों की स्मृतियाँ ..!!

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