ताज महल से भी सुंदर ये हैं दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर, इंजीनियर भी नहीं समझ पाए इसका रहस्य

ताज महल से भी सुंदर ये हैं दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर, इंजीनियर भी नहीं समझ पाए इसका रहस्यताज महल और उसकी सुन्दरता को को हमेशा सराहा जाता है और आज कल तो यह विवाद का विषय और बन गया है. लेकिन हम आपको बता दें की हमारे देश में ऐसे अनेको मंदिर है जिसके सामने ताज कहीं नही ठहरता, ऐसे ही एक मन्दिर के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे है. ब्रहदीश्वर मंदिर ऐसा मंदिर है जिनकी खूबसूरती और उनकी सुंदर पहचान पूरे संसार में प्रसिद्ध  है, और यही वजह  है कि विश्वभर के लोग भारत का इतिहास, यहां की संस्कृति और सुदंरता को निहारनें आतें है.

ताज महल से भी सुंदर ये हैं दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर, इंजीनियर भी नहीं समझ पाए इसका रहस्यखास बात तो यह है कि भारत को सुंदर बनानें के लिए संस्कृति की धरोहर से सुस्सजित विभिन्न प्रकार की आलीशान व इमारतें, मंदिरें, महल और ना जानें क्या-क्या, भारत के हर कोनें में आपको देखनें को मिल जाएगी.  इतना ही नहीं कुछ मंदिर हमारें देश में ऐसे है भी जिनकी संरचनाएं इतनी अद्भुत है कि आज के इंजीनियर्स भी उसे बनाने का तरीका ना तो समझ पाएं हैं और ना ही ढ़ूंढ़ पाए हैं.

ताज महल से भी सुंदर ये हैं दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर, इंजीनियर भी नहीं समझ पाए इसका रहस्यअपनी अद्भुत संरचनाएं के लिए विश्वविख्यात मंदिर (बृहदीश्वर) शिव मंदिर लगभग एक हजार साल पुराना है. इसी विशेषता के कारण यूनेस्को ने भी इस मंदिर को विश्व का एक खास धरोहर माना है. बता दें कि यह मंदिर तमिलनाडु के तंजौर में है जिसें वहां बृहदीश्वर के नाम से जाना जाता है. बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 11वीं सदी में चोल शासक राजाराज चोल प्रथम ने बनवाया था. इस मंदिर की खासयित है इसकी संरचना जो आज तक कोई समझ नही पाया है.

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ताज महल से भी सुंदर ये हैं दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर, इंजीनियर भी नहीं समझ पाए इसका रहस्यआपको जानकर हैरानी होगी है की यह पूरा मंदिर ग्रेनाइट पत्थर से बनाया गया है.यही कारण है कि यह दुनिया में एकलौता मंदिर है जो पूर्ण रूप से ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित है। सोचने वाली बात तो यह है कि इस मंदिर के 100 किमी तक के दायरे में ग्रेनाइट मौजूद नहीं है तो फिर इस मंदिर के निर्माण के लिए यह ग्रेनाइट कहा से लाया गया है.

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इसे बनाने में लगभग 130000 टन ग्रेनाइट का इस्तेमाल हुआ है. करीब एक हजार साल पहले इतनी मात्रा में ग्रेनाइट जुटाना असंभव सा था. इतना ही नहीं इस पत्थर पर खूबसूरत नक्काशी की गई है है जो करना मुश्किल थी, क्योंकि यह पत्थर बहुत कठोर होता है.

ताज महल से भी सुंदर ये हैं दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर, इंजीनियर भी नहीं समझ पाए इसका रहस्यमंदिर के निर्माण कला की एक विशेषता यह भी है कि इसके गुंबद की परछाई धरती पर नहीं पड़ती.  जो अपने आप में एक अश्रीचातिक है. दरसल जब दोपहर के समय पूरे मंदिर की परछाई जब जमीन पर बनती है, तब इस मंदिर के गुंबद परछाई नही बनती है. इस तरह कि संरचना का निर्माण करना या सोचना भी आज भी असंभव सा है,

ताज महल से भी सुंदर ये हैं दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर, इंजीनियर भी नहीं समझ पाए इसका रहस्यइतना ही नहीं इस मंदिर के गुम्बद पर एक पत्थर के ऊपर स्वर्ण-कलश रखा हुआ है और आश्चर्य की बात यह है कि यह कलश कोई स्वर्ण निर्मित नही बल्कि पत्थर का है, जिसका वजन लगभग 80 टन यानि 2200 मन है,जो 66 मीटर (216 फुट) ऊचाई पर एक गुम्बद पर रखा हुआ है. मगर सोचनें वाली बात तो यह है कि उस समय यह पत्थर आखिर कैसे रखा गया होगा?

ताज महल से भी सुंदर ये हैं दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर, इंजीनियर भी नहीं समझ पाए इसका रहस्यवही इस मंदिर के चबूतरे पर नंदी की प्रतिमा बनी है जो पूरे भारत में एक ही पत्थर से निर्मित नन्दी की दूसरी सबसे विशाल प्रतिमा है. इस प्रतिमा की लम्बाई 6 मीटर और चौड़ाई 2.6 मीटर है. जबकि ऊचाई 3.7 मीटर है. यह मंदिर तंजौर के किसी भी कोने से देखा जा सकता है. मंदिर में 13 मंजिलें हैं जबकि हिंदू स्थापित मंदिरों में मंजिलों की संख्या सम होती है जबकि यहां ऐसा नहीं है. इसीलिए यह मंदिर दुनिया का सबसें मंदिर माना गया है.

ताज महल से भी सुंदर ये हैं दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर, इंजीनियर भी नहीं समझ पाए इसका रहस्यबतातें चले कि रिजर्व बैंक ने 01 अप्रैल, 1954 को एक हजार रुपये का नोट जारी किया था जिस पर बृहदेश्वर मंदिर की भव्य तस्वीर है छापी गई थी. 1010 ईस्वी में निर्मित इस मंदिर ने 2010 में अपने एक हजार साल पूरे कर लिए थे. जिसकें उपलक्ष्य में भारत सरकार ने एक हजार रुपये का स्मारक सिक्का भी जारी किया था.

ऐसे अनेको घरोहर है जो कथित मुगलकालीन इमारतो से कहीं अधिक अद्भुत और सुंदर है लेकिन सरकार और समाज द्वारा इन्हें पर्याप्त ध्यान नही दिया जा रहा.

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