आचार्य चाणक्य के अनुसार जानिए स्त्री की सबसे बड़ी ताकत क्या है

आचार्य चाणक्य के अनुसार जानिए स्त्री की सबसे बड़ी ताकत क्या है

आचार्य चाणक्य के अनुसार जानिए स्त्री की सबसे बड़ी ताकत क्या है

आचार्य चाणक्य ने अपने चाणक्य नीति में बताया है कि राजा, ब्राह्मण और स्त्री की सबसे बड़ी ताकत क्या होती है । चाणक्य कहते हैं कि स्त्री ,राजा और ब्राह्मण को आदिकाल से ही विशेष दर्जा दिया जाता है । किसी भी राज्य के विकास और परिवार के पतन में तीनों की भूमिका अहम होती है।

राजा यानि किसी भी देश के प्रधानमंत्री ब्राह्मण यानी ज्ञानी तथा महिलाओं को देश के विकास में प्रमुख स्थान माना जाता है।

राजा की ताकत होती है बाहुबल। आचार्य चाणक्य कहते हैं किसी भी राजा की शक्ति उसका स्वयं का बाहुबल है। वैसे तो किसी भी राजा के अधीन उसकी सेना ,मंत्री और अन्य राजा रहते हैं लेकिन उसका स्वयं का ताकतवर होना भी जरूरी है । यदि कोई राजा स्वयं शक्तिहीन है तो किसी पर राज नहीं कर सकता । राजा जितना शक्तिशाली होगा उतना ही अच्छा शासन रहता है इसलिए जरूरी है कि राजा बाहुबल या शक्तिशाली हो।

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दूसरा है ब्राह्मण की ताकत होती है ज्ञान । किसी भी ब्राह्मण की शक्ति उसका ज्ञान है। ब्राह्मण जितना ज्ञानी होगा उतना ही अधिक सम्मान प्राप्त करेगा। ईश्वर और जीवन से संबंधित ज्ञान ही किसी भी ब्राह्मण की ताकत होती है।

स्त्रियों की ताकत है उनका योवन ,सौंदर्य और मीठी वाणी। चाणक्य कहते हैं कि किसी स्त्री का सौंदर्य और योवन ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति होती है । स्त्री अपने सौंदर्य और यौवन से काम करा सकती है लेकिन यदि कोई स्त्री सुंदर नहीं है लेकिन मधुर व्यवहार वाली है तो वह कभी भी जीवन में परेशानियों का सामना नहीं करती । मधुर व्यवहार से ही वो स्त्री समाज में सम्मान प्राप्त करती है।

 

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