भारत का महान औद्दोगिक इतिहास : भारतीय ऐसा लौह/स्टील उत्पाद बनाते थे जिसमें कभी जंग नहीं लगता था

एक समय था जब भारत को धरती पर सोने की चिड़िया कहा जाता था। जिसका कारण भारत का बेहद संपन्न एवं विकसित होना था। यह वो समय था जब भारत सुई से लेकर बड़े बड़े हथियारों तक का निर्माण खुद ही करता था। जब अमेरिका ब्रिटेन व यूरोपीय देशों में लोग खानाबदोशों की तरह जीवन यापन करते थे तब उस समय भारत में घर घर में ऐसी विशिष्ट प्रणाली के उत्पाद तैयार किये जाते थे जो आज भी दुनिया के लिए मिसाल हैं।

भारतीय स्टील से निर्मित किया गया चाकू जिसमे जंग तो कभी लगता नही इसके साथ ही इसमें कभी जंग नही लगता व तेजी भी बनी रहती है
भारतीय स्टील से निर्मित किया गया चाकू जिसमे जंग तो कभी लगता नही इसके साथ ही इसमें कभी जंग नही लगता व तेजी भी बनी रहती है

यहाँ हम बात कर रहे हैं भारत में खनिजों व इस्पातों की सहायता से तैयार किये जाने वाले उत्पादों व् उनकी निर्माण प्रणाली के बारे में जो धरती पर सबसे उच्चतम तो थी ही इसके साथ ही भारतीयों के पास ऐसी ऐसी तकनीकि थी जिसके सहारे किया गया निर्माण ना ही मात्र बेहद टिकाऊ व बेहद मजबूत होता था बल्कि उसमें कभी भी जंग नही लगता था।

इस प्रणाली से होने वाले कई निर्माण आज भी जस के तस सुरक्षित हैं और उनमे जंग का नामोनिशान तक नही है, चाहे क़ुतुब मीनार परिसर में लगा लौह स्तंभ हो या फिर संग्रहालयों में रखे सदियों पुराने हथियार सभी एकदम सुरक्षित हैं।

NEXT पर क्लिक कर देखें : सदियों पुराना क़ुतुब मीनार में लगा लौह स्तंभ जिसमे आजतक जंग नही लगा 

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