न्याय पाने के लिए 14 वर्ष से यह इंसान कर रहा है कठोर प्रतिज्ञा, जान कर आप की भी आँखे हो जाएंगी नम

राजस्थान के सीकर के डांसरोली में पूर्णमल ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने न्याय पाने के लिए एक अलग तरह कि प्रतिज्ञा ली हुई है। पूर्णमल ने प्रतिज्ञा ली है कि, जब तक इन्हें इनकी पुश्तैनी जमीन नहीं मिलेगी, तब तक ये बदन पर कोई नया कपड़ा नहीं पहनेंगे और ना ही बाल कटवाएंगे ना ही दाढ़ी-मूछ बनवाएंगे।

न्याय पाने के लिए 14 वर्ष से यह इंसान कर रहा है कठोर प्रतिज्ञा, जान कर आप की भी आँखे हो जाएंगी नम

खास बात यो यह है कि, उनको 14 साल हो गए हा इस प्रतिज्ञा का पालन करते हुए और अभी भी पूर्णमल न्याय की प्रतीक्षा किए हुए है। उनकी इस कठोर प्रतिज्ञा ने उनकी हालत एक बिखरी जैसी बना दी है।

परन्तु पूर्णमल को इसका जरा भी अफ़सोस नहीं है और ना ही उनके परिजनों को। क्योंकि सभी को विश्वास है कि एक दिन आएगा जब उनको न्याय मिलेगा और पूर्णमल का प्रण पूरा होगा।

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पूर्णमल के अनुसार गांव में उसकी खातेदारी शुदा पुश्तैनी जमीन है। जिस पर रसूखदारों ने अतिक्रमण कर रखा है। जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए वह पिछले कई सालों से प्रशासन के चक्कर काट रहा है। लेकिन, अभी तक उसकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।

न्याय पाने के लिए 14 वर्ष से यह इंसान कर रहा है कठोर प्रतिज्ञा, जान कर आप की भी आँखे हो जाएंगी नम

राजस्थान पत्रिका द्वारा मिल रही जानकारी के अनुसार पूर्णमल ने बताया कि, जब-तक उसकी जमीन उसे नहीं मिल जाती। वह नए कपडे़ नहीं पहनेगा और अपने सिर के बाल भी नहीं कटवाएगा। न्याय पाने के लिए भले ही उसकी जिंदगी क्यों न गुजर जाए।

बता दे कि पूर्णमल ने यह प्रतिज्ञा 2003 में ली थी। और सालों पहले पहने कपडे़ उसने आज भी धारण कर रखे हैं। जबकि कपडे़ फटने के बाद उनकी इतनी बार सिलाई हो चुकी है कि उसके पेंट-शर्ट में एेसा कोई रंग शायद ही बचा होगा। जिसकी कारी नहीं लगी होगी।

तात्कालिक मुख्यमंत्री विशेषाधिकारी ललित कुमार 2010 में कलक्टर को खातेदारी दिलवाने के मामले में निर्देशित कर चुके हैं। जिसमें प्रार्थना पत्र का अवलोकन कर सुनवाई कराते हुए प्रकरण का निस्तारण करने की बात कलक्टर को लिखी जा चुकी है। पूर्णमल का आरोप है कि अधिकारी हर बार कोई ना कोई पेच निकाल देते हैं। उसकी सुनवाई कहीं नहीं हो रही है।

पूर्णमल के वकील भवानीसिंह शेखावत का कहना है कि पूर्णमल की जमीन के एक हिस्से का केस वे भी लड़ रहे हैं। लेकिन, जमीन पाने के संकल्प का जूनून और खराब होती आर्थिक स्थिति के कारण मैने भी तय कर रखा है कि केस लडऩे के लिए पूर्णमल से फीस नहीं लूंगा।

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