आ गए अच्छे दिन :- भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाओगे तो एफआईआर पुरस्कार में पाओगे…

भ्रष्टाचारी आज सिस्टम को पूरा hijack करके बैठे हैंभ्रष्टाचारी आज सिस्टम को पूरा hijack करके बैठे हैं भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाओगे तो एफआईआर पुरस्कार में पाओगे…

 

आज के युग में जहां सर्वत्र स्वार्थ हावी दिखाई देता है, वहां सत्य के लिए संघर्ष बेहद कठिन हो जाता है। आज हर तरफ लोकतंत्र को लूट-तंत्र में बदलने की कोशिश है। इन दिनों बहादुरगढ़ में पूरी तरह से स्वार्थ और मनमर्जी का शासन है। आम जनता के भविष्य की रत्ती भर भी परवाह किसी को नहीं है।

बहादुरगढ़ में fake एफआईआर लगा लगा कर भ्रष्टाचार के विरोध में आवाज़ बुलंद करने वालो को दबाया जा रहा है। मंगलवार 24 अक्तूबर को दोपहर करीब 12 बजे रविन्द्र सिंह राठी को नगर परिषद कार्यालय में सूचना मिली कि गांव परनाला के ग्रामीण बूस्टिंग स्टेशन पर नगर परिषद द्वारा किसी शौचालय के निर्माण का विरोध कर रहे हैं। पैदल होने के कारण उन्होंने वहां मौजूद पूर्व पार्षद वजीर राठी को अपने स्कूटर पर वहां तक ले चलने के लिए कहा। दोनों वहां गए तो सरपंच सत्यवान राठी की मौजूदगी में अनेक ग्रामीणों ने पंचायत की जमीन पर बिना की अनुमति के शौचालय के निर्माण का विरोध करते हुए कहा कि यहां पर यह निर्माण नहीं होने दिया जाएगा।

 

मंगलवार 24 अक्तूबर को ही शाम करीब 5 बजे नगर परिषद के पालिका अभियंता रमेश शर्मा ने मोबाइल पर फोन करके वजीर राठी को नगर परिषद कार्यालय बुलवाया। एमई रमेश शर्मा के कमरे में परिषद चेयरपर्सन शीला राठी का पुत्र संदीप राठी व वार्ड नंबर-18 से पार्षद युवराज छिल्लर मौजूद थे। वजीर राठी के एमई के कमरे में प्रवेश करते ही युवराज ने उन पर हमला बोल दिया। अचानक हुए इस हमले में करीब 52 वर्षीय वजीर राठी का दांत टूट गया और कान, आंख व मुंह पर गंभीर चोटें आई। वजीर राठी के साथ मारपीट की सूचना मिलते ही अनेक पार्षद एकत्र हुए और शिकायत लेकर शहर थाना पहुंचे। लोगो ने वारदात के करीब पौना घंटा के भीतर शाम 6 बजे शहर थाना में लिखित शिकायत रिसीव करवाई और शहर के ट्रामा सेंटर में वजीर राठी को भर्ती करवाया। जहां चिकित्सक ने 6 बजकर 40 मिनट पर उसकी एमएलआर काटने के साथ ही पीजीआईएमएस रोहतक रेफर कर दिया। लोग उसे लेकर देर शाम पीजीआईएमएस पहुंचे। जहां आंख, दांत व कान के चिकित्सकों के अलावा सर्जन ने जांच करने के बाद दवाई लिख दी और दो दिन बाद दोबारा चैक करवाने की सलाह देकर रात करीब 2 बजे घर भेज दिया।

Loading...

 

इसी बीच लाइनपार थाना पुलिस ने 24 अक्तूबर की ही शाम करीब 8 बजकर 40 मिनट पर गांव कसार निवासी नगर परिषद के एमई ओमदत्त की शिकायत के आधार पर पूर्व पार्षद वजीर राठी, पार्षद पति सतपाल राठी व पत्रकार रवींद्र राठी के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 427/506 के अलावा प्रेवेंशन ऑफ डैमेज ऑफ पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट की धारा 3 के तहत झूठा केस दर्ज कर लिया।

 

कुछ खास लक्ष्यों की पूर्ति के लिए सिंचाई विभाग से प्रतिनियुक्ति पर आए एमई ओमदत्त ने यह केस वेदांत नगर निवासी नरेश पुत्र रामकिशन की शिकायत के आधार पर दर्ज करवाया है। लेकिन सच्चाई यह है कि जिस जमीन (खेवट नंबर-782, खाता नंबर-1088, किला नंबर-101 व रकबा 3 कनाल 18 मरले) पर यह बूस्टर पंप और पार्क है, इसकी मलकियत ग्राम सभा पंचायत के नाम है। इस जमीन की रजिस्ट्री संजय कुमार पुत्र ओमप्रकाश निवासी नांगलोई दिल्ली ने 27 जनवरी 2005 को सेल डीड नंबर 7024 के माध्यम से समस्त ग्रामवासी परनाला तहसील बहादुरगढ़ के नाम करवाई थी। लेकिन परनाला पंचायत से अनुमति लिए बगैर नगर परिषद बहादुरगढ़ वहां अवैध रूप से निर्माण कर रही थी और ग्रामीणों ने इसका विरोध किया तो वजीर राठी, सतपाल राठी व रवींद्र राठी से अपनी राजनीतिक खुन्नस निकालने के लिए यह झूठा केस दर्ज करवाया गया है।

इतना ही नहीं जिस मामले में चोट लगने के बाद पूर्व पार्षद वजीर राठी को करीब शाम 7 बजे उपचार के लिए बहादुरगढ़ के सिविल अस्पताल से पीजीआईएमएस रोहतक रेफर कर दिया था। उसी मामले में घायल वजीर राठी के खिलाफ ही दोषी युवराज छिल्लर की शिकायत पर स्थानीय सत्ता के दबाव में बहादुरगढ़ शहर थाना पुलिस ने रात 10 बजकर 48 मिनट पर भारतीय दंड संहिता की धारा 323 व 506 के अंतर्गत झूठा केस दर्ज कर लिया।

बहादुरगढ़ पुलिस पूरी तरह से स्थानीय राजनीतिक दबाव में निर्दोष लोगों पर झूठे व नाजायज केस दर्ज कर रही है, जबकि भ्रष्टाचार करने वालों को संरक्षण दे रही है। बहादुरगढ़ नगर परिषद में अनेक घोटालों को उजागर करने वाले पार्षद पति वजीर राठी, सतपाल राठी व पत्रकार रवींद्र राठी के विरुद्ध झूठे मुकदमे दर्ज किए जाते हैं। इस मामले में वर्तमान मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा सभी साक्ष्यों व तथ्यों के मद्देनजर ईमानदार जांच के निर्देश देने के बावजूद स्थानीय पुलिस-प्रशासन दुर्भावनापूर्वक काम करता रहा। ऐसे में 17 नवंबर को पीडितो ने जिला अदालत में जमानत याचिका दर की। जिस पर सुनवाई करते हुए माननीय अदालत ने पुलिस और नगर परिषद के विरोध के बावजूद पार्षद पति वजीर राठी, सतपाल राठी व पत्रकार रवींद्र राठी को अन्तरिम जमानत देने के आदेश सुना दिए। पूरी उम्मीद है कि न्यायालय में दूध का दूध और पानी का पानी सबके सामने आ जाएगा।

Follow us on facebook -