विदेशी कम्पनियों की हालत टाइट, पतंजलि के डर से बौखलाई कम्पनियां पहुची कोर्ट, विज्ञापन पर लगवाई रोक

विदेशी कम्पनियों की हालत टाइट, पतंजलि के डर से बौखलाई कम्पनियां पहुची कोर्ट, विज्ञापन पर लगवाई रोक

विदेशी कम्पनियों की हालत टाइट, पतंजलि के डर से बौखलाई कम्पनियां पहुची कोर्ट, विज्ञापन पर लगवाई रोक

पतंजलि का सम्राज्य दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है और ये देखकर विदेशी कम्पनियों के हाथ पांव फूल रहें हैं। जब इन विदेशी कम्पनियों से कुछ भी नही हो रहा है तो विज्ञापनों को विवादित बताते हुए इन विदेशी कम्पनियों ने बॉम्बे और दिल्ली हाईकोर्टस से पतंजलि आयुर्वेद के साबुन टीवी विज्ञापन पर रोक लगवा दी है। यह रोक हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) की मांग पर लगाई गयी है दरअसल हिंदुस्तान यूनिलीवर ने विज्ञापन पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा था कि इसमें उसके साबुन ब्रैंड्स को टारगेट किया जा रहा है। हाई कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक विज्ञापन पर रोक लगाई जाए। कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई 18 सितंबर को करेगा। आपको बता दें कि अभी तक पतंजलि आयुर्वेद की ओर से कोई भी बयान जारी नहीं हुआ है।

विदेशी कम्पनियों की हालत टाइट, पतंजलि के डर से बौखलाई कम्पनियां पहुची कोर्ट, विज्ञापन पर लगवाई रोक टॉयलेट सोप के 15 हजार करोड़ के मार्किट पर HUL का आधा कब्जा है। हिंदुस्तान युनिलीवर के प्रवक्ता ने कहा, ‘हम इस बात की पुष्टि करते हैं कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने पतंजलि के ‘केमिकल बेस्ड सोप’ वाले विज्ञापन पर अलगी सुनवाई तक रोक लगा दी है। मामला कोर्ट में होने के कारण हम इस पर और कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।’

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जानें क्या है मामला ?

पतंजलि के विज्ञापन में लक्स, पेयर्स, लाइफबॉय और डव का नाम लेकर अप्रत्यक्ष तरीके से उपभोक्ताओं को कहा है कि ‘केमिकल बेस्ड साबुनों’ का प्रयोग न करें और प्राकृतिक अपनाएं। पतंजलि का यह विज्ञापन 2 सितंबर से प्रसारित किया जा रहा है। सोमवार को हिंदुस्तान यूनिलीवर ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

HUL के ब्रैंड लक्स पर अप्रत्यक्ष वार करते हुए पतंजलि के विज्ञापन में लाइन है, ‘फिल्मस्टार्स के केमिकल भरे साबुन न लगाओ।’ बता दें कि लक्स के विज्ञापन में सभी बड़े फिल्म सितारें आ चुके हैं। पेयर्स पर निशाना मारते हुए विज्ञापन में लाइन है, ‘टीयर्स बढ़ाए फीयर्स।’ इसके अलावा लाइफबॉय के लिए लाइन है, ‘लाइफजॉय न लाओ यार।

दूसरी विदेशी कम्पनी पहुंची दिल्ल्ली हाई कोर्ट और लगवाई विज्ञपन पर रोक

 

बॉम्बे हाईकोर्ट के बाद अब दिल्ली हाईकोर्ट ने भी फ़िलहाल इन विज्ञापनों पर रोक लगा दी है। साबुन विज्ञापन पर यह रोक अंतरिम है। यह फैसला डेटॉल साबुन बनाने वाली कंपनी रेकिट बेकिंसर की याचिका पर सुनाया गया है।

न्यूज एजेंसी के अनुसार रेकिट बेकिंसर कंपनी के प्रवक्ता ने भी दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि हम पतंजलि के साबुन विज्ञापन पर अंतरिम रोक लगाने में सफल रहे। यह मामला अभी अदालत में है, इस वजह से हम आगे कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। कंपनी ने आरोप लगाया था कि पतंजलि आयुर्वेद के इस विज्ञापन में उसके डेटॉल साबुन को निशाना बनाया जा रहा है।

माना जा रहा है कि पतंजलि के इस विज्ञापन में लक्स, पीयर्स, लाइफबॉय और डव जैसे साबुन ब्रॉन्ड पर निशाना साधा गया हे। विज्ञापन में कहा गया है कि कई कंपनियां नेचुरल प्रोडक्ट की जगह केमिकल का इस्तेमाल कर रही हैं। कंज्यूमर्स से कहा जाता है कि केमिकल प्रोडक्ट की जगह नेचुरल प्रोडक्ट से बने साबुन का इस्तेमाल करें। पतंजलि का यह विज्ञापन 2 सितंबर से प्रसारित हो रहा है।

जानकारों का मानना है की यह कुछ और नही केवल विदेशी कम्पनियों की बौखलाहट है, जिस तरह बाबा राम देव के दंतकांति ने टूथपेस्ट के बाजार का बड़ा हिस्सा हथिया लिया है उसी तरह कहीं साबुन में भी ऐसा न हो इसके लिए ये विदेशी कम्पनियां चिंतित हैं।

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