इस हिन्दू नेता ने ढेर सारा दान देने के साथ बीजेपी और संघ की नींव को अपने कड़े परिश्रम से भी सींचा

आज जिस नेता के बात कर रहे हैं, उनके बारे में आपको भी जानकर हैरानी होगी कि विश्व हिन्दू परिषद् के इस नेता ने बीजेपी की नींव रखने में और संघ को खड़ा करने में अहम योगदान दिया था। इन्होंने ढेर सारा पैसा लगाने के साथ बीजेपी और संघ की नींव को अपने परिश्रम से सींचा है। बात कर रहे हैं हिन्दुओं के अधिकारों के लिए अपना पूरा जीवन लगा देने वाले विश्व के सबसे बड़े संगठन विश्व हिन्दू परिषद् के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद शंकर पंड्या के बारे में!

कुछ समय पहले योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि बाबर, औरंगजेब जैसे आक्रांताओं की बजाय देश की सड़कों का नाम वीर शिवाजी या महाराणा प्रताप के नाम रखे जाने चाहिए। इस पर कथित सेकुलरों ने जमकर बवाल मचाया। सेकुलरों का कहना है कि मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं तो देश के संसाधनों पर पहला हक उन्हीं का है। क्यूंकि लिए हिन्दुओं के अधिकारों की बात करना अल्पसंख्यकों पर अत्याचार का प्रतीक है, शायद उनके लिए सेकुलरवाद का अभिप्राय मात्र भी यही है।

इस पर आनंद शंकर पंड्या ने कहा था कि मुसलमानों को समझने की जरूरत है कि यदि राम मन्दिर अयोध्या में न बनेगा तो क्या कराची में बनेगा? उन्होने राम मनोहर लोहिया को मुसलमानों का सच्चा हितैषी बताते हुए कहा था कि लोहिया भी कहते थे कि बहुसंख्यक हिन्दुओं के अधिकार में मुसलमानों का भी लाभ है।

आनंद शंकर पंड्या का कहना है कि सेकुलर कहे जाने वाले कई नेता, बुद्धिजीवी और मीडिया गुजरात के दंगों का सारा दोष वहां के हिन्दुओं पर डाल रहे हैं। यद्यपि सभी दंगे निंदनीय होते हैं पर आज हिन्दू सवाल पूछ रहे हैं कि गोधरा में अहिंसक और निहत्थे राम-सेवकों को जब जिंदा जला दिया गया, तब कोई क्यों नहीं बोला? कश्मीर में हिन्दुओं पर भयंकर अत्याचार हुए जिससे अरबों रुपए की सम्पत्ति छोड़कर 3 लाख हिन्दू जम्मू और दिल्ली में शिविरों में दयनीय स्थिति में जीवन व्यतीत कर रहे हैं, पर उनके लिए कोई सेकुलर नेता और समाचार पत्र क्यों नहीं बोले? न उन्हें कश्मीर में दुबारा बसाने की बात किसी ने की। यदि गोधरा हत्याकाण्ड की सभी राजनीतिक दलों और समाचार पत्रों ने कड़ी निंदा की होती तो गुजरात की अहिंसक जनता कभी दंगा नहीं करती। इस भूल के लिए उन्हें हिन्दुओं से माफी मांगनी चाहिए।

उनका ये भी कहना है कि 50 साल में पाकिस्तान, बंगलादेश और कश्मीर में 50 लाख से अधिक हिन्दुओं का कत्लेआम हो गया तब भी ये सेकुलर चुप क्यों रहे? जबकि सिर्फ 2 मुसलमान और 2 ईसाई मारे जाते हैं तो सारी दुनिया चिल्लाती है। हिन्दू सोचने लगे हैं कि सारी दुनिया यह मानने लगी है कि हिन्दू अत्याचार सहन करने के लिए ही पैदा हुए हैं। और सहनशीलता का उपदेश सिर्फ उन्हें ही दिया जाता है। ये अपमान और दोहरे मानदंड सहन करने को अब हिन्दू तैयार नहीं हैं।

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उन्होने इस ओर भी ध्यान देने की बात की है कि जब बिन लादेन ने 11 सितम्बर को वल्र्ड ट्रेड सेंटर पर आक्रमण किया तो बुश ने पूरे अफगानिस्तान को बमबारी से बरबाद कर दिया और उसकी सबने तारीफ की, फिर वही लोग गुजरात के दंगों की निंदा क्यों कर रहे हैं? जिन्होंने गोधरा के भयंकर हत्याकाण्ड की निंदा नहीं की, उन्हें गुजरात के दंगों की निंदा करने का कोई अधिकार नहीं है। ये छद्म सेकुलर ही हिन्दुओं और मुसलमानों में भेद करके उनके मनमुटाव को पिछले 50 साल से निरंतर बढ़ाते जा रहे हैं। देश में साम्प्रदायिकता बढ़ाने में इनकी प्रमुख भूमिका है।

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