जानें आचार्य चाणक्य के अनुसार – प्रत्येक व्यक्ति के पांच पिता होते हैं

जानें आचार्य चाणक्य के अनुसार – प्रत्येक व्यक्ति के पांच पिता होते हैं

जानें आचार्य चाणक्य के अनुसार - प्रत्येक व्यक्ति के पांच पिता होते हैं

माना जाता है कि धरती पर भगवान हर जगह नहीं होते इसलिए उन्होंने माता-पिता को बनाया है। दुनिया में चाहे आप से कोई भी कितना भी प्यार करे लेकिन माता पिता की जगह कोई नहीं ले सकता। आचार्य चाणक्य के अनुसार हर व्यक्ति के जीवन में उसके 5 पिता होते हैं यानी जन्म देने वाली माता-पिता के अलावा 4 लोग होते हैं जो पिता समान होते हैं । आइए जानते हैं आचार्य चाणक्य ने चाणक्य नीति में क्या कहा है।

1. जन्मदाता

चाणक्य कहते हैं उस देवता या पिता का अपमान नहीं करना चाहिए जिसके आप अंश हैं । जन्म देने वाला पिता सबसे बड़ा होता है ।

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2. संस्कार देने वाला व्यक्ति

पहले के समय में जैसे घर के बुजुर्ग दादा नानी आदि बच्चों को संस्कार और संस्कृति का ज्ञान देते थे । आधुनिक काल में यह चलन खत्म होता जा रहा है । आचार्य चाणक्य के अनुसार जिस व्यक्ति ने आपको संस्कार दिए हैं वह आपके पिता के समान है।

3. विद्या दान देने वाला व्यक्ति

चाणक्य के अनुसार विद्या उतनी ही जरुरी है जितना भोजन इसलिए उनके अनुसार जो व्यक्ति आपको शिक्षित करता है वह आपके पिता के समान होता है।

4. भोजन देने वाला व्यक्ति

भूखे पेट संसार का हर ज्ञान व्यर्थ है इसलिए चाणक्य कहते हैं जिस व्यक्ति की वजह से आपको भोजन मिलता है वह व्यक्ति आपके पिता के समान हैं।

5. बुरे समय में साथ देने वाला व्यक्ति

चाणक्य कहते हैं दुनिया में साथ देने वाले लोग बहुत कम मिलते हैं अगर मुश्किलों के वक्त किसी ने आप का साथ दिया है तो वह व्यक्ति आपके पिता सामान है।

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