जानें – द्वापर युग कालीन भूमि  “तपोभूमि वोडा महादेव स्थान” के बारे में

जानें – द्वापर युग कालीन भूमि  “तपोभूमि वोडा महादेव स्थान” के बारे में

जानें - द्वापर युग कालीन भूमि  “तपोभूमि वोडा महादेव स्थान” के बारे में

सनातन धर्म के प्राचीन ग्रंथों में वोडा महादेव की चर्चा है। मान्यता है कि इसकी स्थापना मनसा देवी के पुत्र श्री वोडा जी ने की थी। परशुराम जी ने इसी स्थान पर  शिवत्व की प्राप्ति के लिए वोडा महादेव का पूजन किया था और इसे विश्व भर के सिद्ध पीठों में से एक माना जाता है।

वर्तमान में यह स्थान भारत की राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा के सेक्टर 100 में “तपोभूमि वोडा महादेव स्थान” के नाम से विख्यात है। द्वापर युग कालीन यह भूमि अत्यंत चमत्कारिक है। यहाँ लम्बे समय से शैव और शाक्त मार्गी सिद्ध संतो द्वारा गुप्त अनुष्ठान किया जाता रहा है।

जानें - द्वापर युग कालीन भूमि  “तपोभूमि वोडा महादेव स्थान” के बारे मेंवोडा महादेव स्थान परिसर में अत्यंत प्राचीन गुफा है जिसे सिद्ध संत अपनी सिद्धि, अनुष्ठान व तप स्थली के रूप में उपयोग करते आ रहे हैं। इस मंदिर के वर्तमान नागा संत महंत जयराम भारती जी को अनेक वर्षों से इसी स्थान पर कठिन तप के द्वारा सिद्धि प्राप्त है।

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इस मंदिर परिसर में जागृत वोडा महादेव व मनोकामना नंदी देव के अतिरिक्त सिद्धि प्राप्त छिन्नमस्तिका माता व सिद्धि दात्री यंत्र, गणपति जी, माँ दुर्गा, श्री राम परिवार, हनुमान जी,राधा कृष्ण जी, शनि देव व काल भैरव, क्षेत्रपाल देव इत्यादि भी विराजमान हैं। इस तपोभूमि की शांति व परमानन्द अद्भुद है।

यहां का प्राकृतिक सौन्दर्य अतुलनीय है। मंदिर परिसर में बिल्वपत्र, चंपा, सफ़ेद आंकड़ा, आंवला, नीम, पीपल, बरगद इत्यादि के प्राचीन से प्राचीन वृक्ष एक साथ स्थित हैं। आसपास स्वच्छ सुंदर सा हरा-भरा बगीचा देखते ही बनता है। प्रवेश द्वार के पास एक पाप-नाशिनी सरोवर है। सामने क्षेत्रपाल का छोटा सा मंदिर है। आगे एक विशाल प्रवेश द्वार को पार कर वोडा महादेव के दर्शन प्राप्त होते हैं। ध्यान के लिये कई स्थान बने हुए हैं। यहाँ मोर इत्यादि कई मनोहर पक्षी सहज ही विचरण करते नजर आते हैं।

मंदिर परिसर में एक और प्राचीन तालाब है जिसके साथ विशाल हवन स्थल बना हुआ है। यहां एक बड़ी सी गौशाला भी स्थित है। महंत भारती बताते हैं कि यह बहुत प्राचीन स्थल होने के साथ-साथ तपोभूमि भी है। यहाँ कई पीढ़ियों से ऋषि-मुनि, साधू-संत से जप तप करते आ रहे हैं और उनके ध्यान तप में व्यवधान न हो इस लिए यहाँ पूर्ण शांति व स्वछता बनाये रखने की अत्यंत आवश्यकता है।

जानें - द्वापर युग कालीन भूमि  “तपोभूमि वोडा महादेव स्थान” के बारे मेंयह स्थान स्वतः जागृत है क्योंकि यहाँ स्वयं ब्रह्मर्षि परशुराम ने भी महादेव की प्रसन्नता के किये कठोर तप किया था। यहाँ लोग अपनी मनोकामना पूरी करने या किसी भी क्षेत्र में विजय प्राप्त करने के लिए यज्ञ, हवन, पूजन एवं रुद्राभिषेक करने आते हैं।

प्राचीन गुफा  पर बने माता के मंदिर में दुर्गा सप्तशती का अखंड पाठ विद्वान वैदिकों द्वारा किया जाता है। यहाँ की प्रदोष काल की महादेव-आरती का अत्यंत महत्व है। सैकड़ों की संख्या में भक्त यहां इस आरती में शामिल होने दूर-दूर से आते हैं।

इस स्थान पर साधक व भक्त अपनी अध्यात्मिक चेतना के लिए अनुशासित मौन शांति के साथ ही जा सकते हैं। महंत जी परिसर की शांति व अनुशासन को ले कर अत्यंत सवेदनशील हैं। समय-समय पर होने वाले विशिष्ट पूजनों में यहां विश्व भर से आये अनुशासित भक्तों का मेला लगा रहता है।

अगर आप भी अध्यात्मिक चेतना व मनोकामना पूर्ति के लिए किसी खास सिद्ध स्थल की तलाश में हैं तो अनुशासित रूप से जा कर इस तपो-भूमि के दर्शन अवश्य करें।

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