महाभारत के इन तथ्यों से आज भी अनजान हैं लोग

भारत के अनुपम धार्मिक, पौराणिक, ऐतिहासिक और दार्शनिक ग्रंथ ‘महाभारत’ के आज भी कई रहस्य ऐसे है जिनसे ढेरों लोग अनजान हैं। ये रहस्य बेहद रोचक और हैरान कर देने वाले है।

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यह ग्रन्थ केवल भारत का ही नहीं बल्कि पूरे विश्व का सबसे लंबा साहित्यिक ग्रंथ माना गया है। बेशक आज तक अनगिनत कथाओं, किताबों और यहां तक की मीडिया के माध्यम से भी मनुष्य को महाभारत जैसे महान ग्रंथ के बारे में अत्यंत जानकारी प्रदान की गई है मगर आज हम आपको इस ग्रंथ के कुछ अनछुए पहलू बताएंगे।

दुर्योधन का असल नाम क्या था ?

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कौरवों में सबसे बड़े राजकुमार दुर्योधन को सब जानते हैं। वे ना केवल कौरवों के जेष्ठ भाई थे बल्कि पांडवों के विरुद्ध सबसे आगे खड़े होने वाले राजकुमार भी थे। मगर क्या आप जानते हैं कि उनका असली नाम राजकुमार दुर्योधन नहीं बल्कि राजकुमार सुयोधन है।

तो इसलिए द्रौपदी के स्वयंवर में दुर्योधन शामिल नहीं हुए

राजकुमार दुर्योधन पांडव भाइयों से द्वेष रखते थे। मगर इतने कठोर दिल के होने के बावजूद भी उन्होंने मरते दम तक अपनी पत्नी भानूमति से किया एक वचन नहीं तोड़ा था। भानूमति ने दुर्योधन से यह वचन लिया था कि वे उनके अलावा किसी और स्त्री से विवाह नहीं करेंगे। बस यही कारण है कि द्रौपदी के स्वयंवर में दुर्योधन शामिल नहीं हुए थे।

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ये दो कौरव भाई पांडवों के साथ युद्ध के पक्ष में नहीं थे 

पांडवों और कौरवों के बीच हुए कुरुक्षेत्र युद्ध को समस्त संसार भली-भांति जानता है मगर क्या आप जानते हैं कि सभी कौरव भाई इस युद्ध के पक्ष में नहीं थे। महाराज धृतराष्ट्र के दो पुत्र- राजकुमार विकर्ण और राजकुमार युयुस्त ने जुए के खेल में बड़े भाई दुर्योधन द्वारा द्रौपदी को लज्जित करने का विरोध किया था।

महाभारत का युद्ध शकुनी का बदला था 

सब जानते हैं कि कौरवों द्वारा रचा गया जुए का खेल असल में अकेले कौरवों का षड्यंत्र नहीं था बल्कि इसके पीछे दिमाग कौरवों के शकुनी मामा का था। मगर शकुनी ने ये खेल कौरवों के लिए नहीं बल्कि अपने फायदे के लिए यह खेल रचा था। वो कौरवों और पांडवों का युद्ध करवा कर अपनी बहन और उसके परिवार पर हुए अत्याचार का बदला लेना चाहता था।

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