कई हजार साल पुराने इस महादेव मन्दिर में मौजूद है स्वर्ग द्वार का रहस्य…

कई हजार साल पुराने इस महादेव मन्दिर में मौजूद है स्वर्ग द्वार का रहस्य...

भगवान शिव के बारे में कहा जाता है कि वे कण-कण में मौजूद हैं और उन्हें देवों में महादेव भी कहा जाता है। उनके रहस्यों के बारे में ढेरो पुराणों में जिक्र है और उन्हीं में से एक में मौजुद है वो जानकारी जो जुडी है स्वर्ग द्वार के रहस्य से। जी हाँ मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित चौरासी महादेव में से एक स्वर्गद्वारेश्वर महादेव मन्दिर की महिमा, गणों और देवताओं के संघर्ष व देवताओं की स्वर्ग प्राप्ति से जुड़ी हुई है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, स्वर्गद्वारेश्वर ही वो जगह जगह है जहाँ के पूजन अर्चन से इंद्र समेत सभी देवताओं को स्वर्ग की प्राप्ति हुई थी।

Loading...

माना जाता है कि एक बार माता सती के पिता दक्ष प्रजापति ने भव्य यज्ञ का आयोजन किया था। इस दौरान उन्होंने सभी देवी-देवताओं व गणमान्यों को बुलाया पर अपनी पुत्री सती और उनके स्वामी भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया।

लेकिन फिर भी माता सती उस यज्ञ में उपस्थित हुईं, जहाँ उन्होंने देखा कि दक्षराज उनके स्वामी देवाधिदेव महादेव का अपमान कर रहे थे। बस यह देख वे अत्यंत क्रोधित हुईं और उन्होंने अग्निकुण्ड में कूद कर अपने प्राण त्याग दिये थे।

भगवान शिवजी ने माता सती को पृथ्वी पर मूर्छित देखा तो वे अत्यंत क्रोधित हुए। जिस पर उन्होंने उस यज्ञ का नाश करने के लिए अपने गणों को वहां भेजा। इस दौरान अस्त्र-शस्त्र से युक्त गणों का वहां देवताओं से भीषण संघर्ष हुआ। तब गणों में से एक वीरभद्र ने इंद्र को अपने त्रिशूल के प्रहार से मूर्छित कर दिया। जिसके बाद गणों के सामने देवताओं की शक्ति क्षीण होने लगी।

इसके बाद सभी देवता भगवान श्री विष्णु के पास पहुंचे और मदद के लिए अनुरोध किया। भगवान विष्णु देवताओं की व्यथित दशा देखकर क्रोधित हुए और और उन्होंने अपने दिव्य सुदर्शन चक्र से गणों पर प्रहार कर दिया।

तब सुदर्शन चक्र तीव्रता से गणों को नष्ट करने लगा। अंत में जब भगवान विष्णु वीरभद्र की ओर बढ़े और गदा से प्रहार किया, लेकिन गणों में उत्तम वीरभद्र शिवजी के वरदान के कारण नहीं मरा।

भगवान विष्णु के प्रहार से गण भागने लगे और भगवान शिव के पास पहुँचे। उनके पीछे-पीछे विष्णु और सुदर्शन भी वहाँ पहुँचे। वहाँ शिवजी को शुल लिए देख भगवान विष्णु सुदर्शन चक्र सहित अंतर्ध्यान हो गए।

इस प्रकार यज्ञ का विध्वंस हो गया और शिवजी ने अपने गणों को स्वर्ग के द्वार पर बैठा दिया और आज्ञा दी कि किसी भी देवता को स्वर्ग में प्रवेश न दिया जाये। तब सभी देवता एकत्रित हो ब्रम्हाजी के पास गए और अपना शोक प्रकट किया।

देवताओं ने ब्रम्हाजी से कहा कि कृपया हमें कोई उपाय बताएं ताकि हमें स्वर्ग की प्राप्ति हो सके। सारी बातें जानकार ब्रम्हाजी ने कहा आप सभी शिवजी की शरण में जाएं और उनकी आराधना कर उन्हें प्रसन्न करें।

आप सभी महाकाल वन जाओ, वहां कपालेश्वर के पूर्व में एक दिव्य लिंग है उसकी आराधना करो। तब इंद्र इत्यादि देवता महाकाल वन पहुँचे और उस लिंग के दर्शन किये।

उस लिंग के दर्शन मात्र से शिवजी ने स्वर्गद्वार स्थित अपने गणों को हटा लिया और देवताओं को स्वर्ग की प्राप्ति हुई। इसलिए उस लिंग को स्वर्गद्वारेश्वर कहा जाता है।

Follow us on facebook -