हजारों साल पुराने इस अद्भुत मंदिर में बारिश से पहले ही टपकने लगती है छत – वैज्ञानिक हैरान

हजारों साल पुराने इस मंदिर में बारिश से पहले ही टपकने लगती है छत - वैज्ञानिक हैरानहजारों साल पुराने इस अद्भुत मंदिर में बारिश से पहले ही टपकने लगती है छत – वैज्ञानिक हैरान

 

भगवान जगन्नाथ का एक ऐसा मंदिर है, जिसकी छत बारिश होने के पहले ही टपकने लगती है। इसमें भी एक खासियत यह है कि टपकी बूंदें भी उसी आकार की होती हैं, जैसी बारिश होनी होगी।

तमाम सर्वेक्षणों के बाद भी इसके निर्माण का सही समय पुरातत्व वैज्ञानिक नहीं लगा सके हैं। बस इतना ही पता लग पाया कि मंदिर का अंतिम जीर्णोद्धार 11वीं सदी में हुआ था। उसके पहले कब और कितने जीर्णोद्धार हुए या इसका निर्माण किसने कराया आदि जानकारियां आज भी अबूझ पहेली बनी हुई हैं। लेकिन बारिश की जानकारी पहले से लग जाने से किसानों को अपने काम निपटाने में जरूर सहायता मिलती है।

उत्तर प्रदेश के कानपुर जनपद का यह मंदिर जनपद के भीतरगांव विकासखंड मुख्यालय से तीन किलोमीटर पर बेंहटा गांव में स्थित है। मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलदाऊ और बहन सुभद्रा की काले चिकने पत्थर की मूर्तियां स्थापित हैं। वहीं सूर्य और पद्‍मनाभम भगवान की भी मूर्तियां हैं।

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हजारों साल पुराने इस मंदिर में बारिश से पहले ही टपकने लगती है छत - वैज्ञानिक हैरानमंदिर की दीवारें 14 फुट मोटी हैं। वर्तमान में मंदिर पुरातत्व के अधीन है। मंदिर से वैसे ही रथ यात्रा निकलती है, जैसे पुरी उड़ीसा के जगन्नाथ मंदिर से निकलती है।

इस मंदिर की यह भी एक खासियत है की यह बारिश के आगमन से 7 दिन पहले ही चेतावनी देने लगती है। इस मंदिर में कई बार वैज्ञानिको की टीम आ चुकी है और उन्होंने इस मंदिर का कई बार अध्यन भी किया लेकिन उन्हें अब तक इस बात की जानकरी नही मिल पाई की आख़िरकार मंदिर की छत से पानी कैसे टपकता है।

स्थानीय लोगों की माने तो भगवान जगन्नाथ की इस मंदिर से पानी की बूंद मोटी टपके तो अच्छी बारिश का सकेंत मानतें हैं और अगर बूंद छोटी हो तो सूखे की आशंका माना जाता है।

मंदिर का आकार बौद्ध मठ जैसा दिखता है, जिससे इसके अशोक के द्वारा बनवाया हुआ होना बताते हैं। वहीं बाहर मोर के निशान और चक्र बने होने से चक्रवर्ती सम्राट हर्षवर्धन के समय में बने होने का अंदाजा भी लगाया जाता है।

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