हजारों साल पहले अफ्रीका में फैला हुआ था हिन्दू धर्म, मिला 6 हजार साल पुराना शिवलिंग

हजारों साल पहले अफ्रीका में फैला हुआ था हिन्दू धर्म, मिला 6 हजार पुराना शिवलिंग भगवान शिव कहां नहीं हैं? कहते हैं कण-कण में हैं शिव, कंकर-कंकर में हैं भगवान शंकर। कैलाश में शिव और काशी में भी शिव और अब अफ्रीका में शिव।

साउथ अफ्रीका में भी शिवलिंग का पाया जाना इस बात का सबूत है कि आज से 6 हजार वर्ष पूर्व अफ्रीकी लोग भी हिंदू धर्म का पालन करते थे।

अफ्रीका या कालद्वीप, एशिया के बाद विश्व का सबस बड़ा महाद्वीप है। दक्षिण अफ्रीका के दक्षिणी छोर पर स्थित एक गणराज्य है। आधुनिक मानव की बसावट दक्षिण अफ्रीका में एक लाख साल पुरानी है।

यूरोपीय लोगों के आगमन के दौरान क्षेत्र में रहने वाले बहुसंख्यक स्थानीय लोग आदिवासी थे, जो अफ्रीका के विभिन्न क्षेत्रों से हजार साल पहले आए थे।

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वैसे तो शिव जी के मंदिर विश्व भर में हैं, चाहे अमेरिका हो, ऑस्ट्रेलिया हो या फिर अफ्रीका। लेकिन हम आपको बता दें कि अफ्रीका में 6 हजार वर्ष पूर्व प्रचलित था हिंदू धर्म।

दक्षिण अफ्रीका में भी शिवलिंग का पाया जाना इस बात का सबूत है कि शिव की महिमा और प्रताप पूरे विश्व भर में है।

साउथ अफ्रीका के सुद्वारा नामक एक गुफा में पुरातत्वविदों को महादेव की 6 हजार वर्ष पुराना शिवलिंग मिला, जिसे कठोर ग्रेनाइट पत्थर से बनाया गया है।

इस शिवलिंग को खोजने वाले पुरातत्ववेत्ता हैरान हैं कि ये शिवलिंग यहां अभी तक सुरक्षित कैसे रह पाया है।

हाल ही में दुनिया की सबसे ऊंची शिवशक्ति की प्रतिमा का अनावरण भी दक्षिण अफ्रीका में किया गया। बेनोनी शहर के एकटोनविले में यह प्रतिमा स्थापित की गई है।

इसके अनावरण के बाद शिव की महिमा चारो ओर फैल गई है। 10 कलाकारों ने 10 महीने की कड़ी मेहनत के बाद इस प्रतिमा को तैयार किया है। कलाकार भारत से गए थे। इस 20 मीटर ऊंची प्रतिमा को बनाने में 90 टन के करीब स्टील का इस्तेमाल हुआ है।

 

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