जानें :- ग्लोबल माफियाओं का धरती कब्जाने का एजेंडा है ग्लोबल वार्मिंग

ग्लोबल माफियाओं का धरती कब्जाने का एजेंडा है ग्लोबल वार्मिंगग्लोबल माफियाओं का धरती कब्जाने का एजेंडा है ग्लोबल वार्मिंग

 

ग्लोबल वार्मिंग को लेकर वैश्विक स्तर पर खूब हो हल्ला हो रहा है विश्व भर की मीडिया भी इसके लिए खूब शोर मचा रही है और मुद्दे को कुछ इस तरह पेश कर रही है की जैसे ग्लोबल वार्मिंग के कारण दुनियां ख़त्म होंने वाली ही है.

पिछले दिनों पेरिस पर्यावरणीय समझौते से अमेरिका के अलग होने के बाद से ये मुद्दा और भी ज्यादा गर्मा गया था. दुनिया भर के राष्ट्रध्यक्ष इस समय ग्लोबल वार्मिंग का उपाय ढूंढ़ रहे हैं और आये दिन अन्तर्राष्ट्रीय बैठकें आयोजित हो रही हैं.

ग्लोबल वार्मिंग मुद्दे की पुरजोर वकालत करने वाले अमेरिका के नोबल विजेता पर्यावरणविद् अल गोर ने एक साक्षात्कार में कहा था, ‘ग्लोबल वार्मिंग समस्या से लड़ने के लिए भगवान ने उन्हें चुना है.’ अल गोर ग्लोबल वार्मिंग मुद्दे पर दुनिया का एक चर्चित चेहरा हैं जिन्होंने पिछले कई दशकों से इस समस्या पर अभियान चला रखा है. ग्लोबल वार्मिंग पर अल गोर ने कई फ़िल्में और डाक्युमेंट्रीज और फ़िल्में भी बनाई हैं. पर्यावरण के मुद्दे पर उन्हें नोबल पुरस्कार भी मिल चुका है.

पर यह बेहद विरोधाभाषी है कि, अल गोर एक ऐसे देश से आते हैं जिसका धरती का कबाड़ा करने में सबसे बड़ा हाथ रहा है और उनके देश में कार्बन उत्सर्जन की प्रति व्यक्ति दर विकासशील राष्ट्रों की तुलना में दस गुणना अधिक है. अमेरिका ही वह देश है जो कार्बन और जहरीली गैसों का सबसे ज्यादा उत्सर्जन करने वाला देश है लेकिन इसका दूसरा पक्ष यह है कि, ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण मुद्दे को लेकर जो देश स्स्बे ज्यादा दुनिया को भाषण पिलाता आया है वह भी अमेरिका ही है.

Loading...

एकतरफ अमेरिका पर्यावरण सम्मेलनों के किसी भी नियम को नहीं मानता और दूसरी तरफ वह और उसके अल गोर जैसे बुद्धिजीवी दुनिया से यह आशा करते हैं कि, वे अपना विकास रोकें या कुछ भी करें बस कार्बन उत्सर्जन कम करें. ऐसे में यह सवाल उठाना स्वाभाविक है कि, आखिर दुनियाभर में अपनी चौधराहट कायम रखने के लिए उतावला रहने वाला देश ग्लोबल वार्मिंग मुद्दे को लेकर इतना गंभीर क्यों हैं और वह क्या कारण है जिसके लिए अमेरिकी एवं यूरोपीय बुद्धिजीवी और उनके प्यादे ग्लोबल वार्मिंग को लेकर अभियान छेड़े हुए हैं. दरअसल यह मामला कुछ और नहीं बल्कि ग्लोबल वार्मिंग मुद्दे को आगे रखकर दुनियाभर के देशों को नियंत्रित करना है जिसे राजनीतिक भाषा में विश्व सरकार (ग्लोबल गवर्नेंस) कहा जाता है.

NEXT कर आगे पढ़ें :- आखिर क्या है ग्लोबल गवर्नेंस 

Follow us on facebook -